आज हम ले रहे हैं तुझसे विदा,
पर याद तू रहेगा हमे सदा........
जब नए- नए हम तेरे पास आये थे
थोड़ा डरे थोड़ा घबराए थे .
धीरे -धीरे तुझे हम अपना बना पाए ,
तुझसे बहुत कुछ सीखा बहुत कुछ पाया
अब उन्ही कक्ष्हाओ की आती है हमे याद,
जिनमे पढाई के साथ होता था हसी मज़ाक
इसी जगह हमने अपने जीवन को जाना ,
उसका सच्चा सही अर्थ पहचाना
तूने दिए हमे अनगिनत सुख,
पर देना नहीं भूला थोड़े से दुःख
लेकिन ज़िन्दगी की यही तो है रीत ,
एक हाथ हार तो दूसरे में है जीत
इसी तरह रहा हमे अपने दोस्तों पर हर्ष
न जाने हो गया ये कब,
हुआ अच्छा चाहे हुआ हो जब
धीरे-धीरे हम तुझसे इतना जुड़ गए,
की तेरे बिन जीवन की कल्पना भूल गए
तब तक समझ में न आती थी उनकी व्यथा ,
जो कहती थी उदासी और बिछड़ने की कथा
अब आ गयी है वोह घडी,
सामने हमारे है नयी ज़िन्दगी खड़ी
मन तो नहीं है, पर है जाना,
क्यूंकि हमे है अपनी मंजिल को पाना
मो- इरफ़ान शाहिद