Thursday, January 27, 2011

विदा

आज हम ले रहे हैं तुझसे विदा,

पर याद तू रहेगा हमे सदा........

जब नए- नए हम तेरे पास आये थे

थोड़ा डरे थोड़ा घबराए थे .

धीरे -धीरे तुझे हम अपना बना पाए ,

तुझसे बहुत कुछ सीखा बहुत कुछ पाया

अब उन्ही कक्ष्हाओ की आती है हमे याद,

जिनमे पढाई के साथ होता था हसी मज़ाक

इसी जगह हमने अपने जीवन को जाना ,

उसका सच्चा सही अर्थ पहचाना

तूने दिए हमे अनगिनत सुख,

पर देना नहीं भूला थोड़े से दुःख

लेकिन ज़िन्दगी की यही तो है रीत ,

एक हाथ हार तो दूसरे में है जीत

इसी तरह रहा हमे अपने दोस्तों पर हर्ष

न जाने हो गया ये कब,

हुआ अच्छा चाहे हुआ हो जब

धीरे-धीरे हम तुझसे इतना जुड़ गए,

की तेरे बिन जीवन की कल्पना भूल गए

तब तक समझ में न आती थी उनकी व्यथा ,

जो कहती थी उदासी और बिछड़ने की कथा

अब आ गयी है वोह घडी,

सामने हमारे है नयी ज़िन्दगी खड़ी

मन तो नहीं है, पर है जाना,

क्यूंकि हमे है अपनी मंजिल को पाना



मो- इरफ़ान शाहिद

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