Wednesday, February 2, 2011

मै और मेरी जिंदगी.........


आज जब मै अकेला हू, तो मुझे अपनी जिंदगी से कुछ बातें है शायद वो सब, जो आज तक मै किसी से कह न सका. वही हकीकत जो काफी दिनों से मेरे सीने में दबी है. मेरे जिंदगी के

वो दौर जो मैंने बिताए हैं , चाहे वो दुःख हो या हो ज़िन्ग्की की खुशियाँ अभी तक जो बाते सिर्फ सोच कर दिल में ही रह जाती थी आज वो मै खुद तुमसे बाटना चाहूँगा .

आज हम जिस फोटो एल्बम को देख रहे थे तभी वो सारे दिन याद आ गए, मम्मी के हाथों की बिरयानी और पापा का हमे क्रिकेट सिखाना............सुबह ६ बजे जगाना और फिर खूब देर तक मैदान में दौड़ाना मेरे गिर जाने पर मुझे उठाना , बहुत याद आते हैं वो दिन जब सिर्फ और सिर्फ मेरे करीब मेरे मम्मी-पापा होते थे और हमे कितना कुछ बताते....... कितना मज़ा आता था तब , जब पापा अपनी बॉलिंग से जल्दी -जल्दी विकेट गिराते और हम खूब जोर से चिल्लाते और जब मैच ख़त्म हो जाता तो हमे भी बॉलिंग सिखाते... मुझे रोजाना बिना नागा किये वो क्रिकेट सिखाते और शाम को वो पढ़ाते. कितने हसीं थे वो दिन जब बहुत कम था सोचने को, पर आज बहुत ज्यादा है सोचने को और आज सोचने को इतना ज्यादा है लेकिन वक़्त कम पड़ जाता है ऐ जिंदगी, बहुत सी मीठी यादे आज भी आती है मुझे लेकिन अफ़सोस है की वो वक्त दुबारा नहीं आ सकता . वो मासूम बचपना, बिना किसी फ़िक्र के दिन बीत जाते थे और खेल- खेल में कितना मज़ा आता था !

मम्मी की रोज़ की डांट और फिर क्रिकेट के खिलाफ उनका गुस्सा . सब बहुत याद आते हैं.......... मम्मी को रोज़ कोई नई-नई फरमहिशे बताना और उनका मेरी मन पसंद चीजों को पूरा करना, कितने हसीन थे वो दिन ! मेरी अम्मा का रोजाना हमे जगाना और उनका अनोखा प्यार..... आज भी याद आती है वो मक्के की रोटी और चने का साग जिसके लिए हमको हमेशा जाड़ो का इंतज़ार करना पड़ता है. हर ज़रूरतों को पूरा करने वाली मेरी अम्मा जिनका प्यार घर में मेरे लिए सबसे ज्यादा है, और मुझे सबसे ज्यादा प्यार भी अम्मा से ही मिला......

बचपना तो बहुत ख़ूबसूरत था पर जैसे-जैसे बड़े होते गए इन सारी खुशियों से दूर होते गए और एक व्यस्त ज़िन्दगी की ओर बढ़ते गए, हाई स्कूल के बाद इंटर और अब ग्रजुएशन. इसी के साथ मिले कुछ प्यारे दोस्त जिन्होंने मेरी ज़िन्दगी के माएने बदल दिए और आज जिन लोगो की दोस्ती मुझे मिली उन लोगो ने मुझे अपने बीते दिनों के गम को भुला दिया! लेकिन शायद ये कभी सोचा भी न था की जिन दोस्तों का सहारा मिला है वह भी एक दिन दूर चले जायेंगे, और आज फिर एक बार मुझे अपनी ज़िन्दगी के बारे में सोचने के लिए अकेला छोड़ जायेंगे. इस उतार चढाओ भरी ज़िन्दगी ने सब कुछ सिखा दिया है, की हमको अपना सफ़र अकेले ही तै करना होगा... अपनी मंजिल खुद ही तलाशनी पड़ेगी !

ये फोटो देख कर वो सभी दिनों की याद आती है जब हम एक दूसरे को चिढाते रहते थे और कॉलेज से बाहर जाकर खूब मस्ती करते थे..........

क्या थी ज़िन्दगी और क्या हो गयी है ??? अफ़सोस तो होता है,पर अपनी कामयाबी को पाने के लिए ही सही, ज़िन्दगी तुझे जीने का मन करता है.......................





मो - इरफान शाहिद

3 comments:

  1. इरफ़ान इसमें एल्बम का फोटो लगाते और अच्छा रहता दुहराव ज्यादा है भाव निकालो जो स्वाभाविक रूप से निकलें लिखते रहो फिर देखो प्रैक्टिकल का मज़ा

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  2. Irfu, for me... this piece works.. its like somewhere connecting to all... n specially the last lines.. good work.. n we all know tht u can do better... !!

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  3. kehte hai na jab bht yaad aaye to photos album ko dekh le yaa purani diary padh lo.. aaj ye padh kar sab yaad aa gaye.. keep writing..irfu..

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