इमारतें हैं जिसकी शान अदब व तहज़ीब है जिसकी जान
वो है हिन्दुस्तान की खूबसूरती का दूसरा नाम ,
वो है लखनऊ मेरी जान .......................
अमन व शांति वाला शहर जिसकी तहजीब और नजाकत उसकी जान है वो शहर लखनऊ है ।
अभी तक सुना तो बहुत था इन इमारतों के बारे में और लखनऊ के इतिहास के बारे में लेकिन उसको जानने का मौका कभी न मिला था खुश किस्मती है की इस शहर की खूबियों को जान ने का मौका मिल ही गया , वो भी एक हेरिटेज वाल के ज़रिये जिसकी शुरुआत टीले वाली मस्जिद से लेकर टुंडे कवाबी तक चली .जिसके ज़रिये तमाम चीजों की जानकारी भी मिली जो शायद हमें इस से पहले नहीं थी । ये वक शनिवार सुबह ८ बजे से शुरू हुई और दिन में १ बजे ख़तम हुई ये ५ घंटे की हेरिटेज वाक़ ने उन तमाम चीजों की जानकारी दी जो शायद मुझे पिछले ५ सालों में न थी । चाहे वो हो टीले वाली मस्जिद का इतिहास, या वो हो भूल भुलैय्या जैसी चौक की गलियों का राज फ्फिरंगी महल हो या वो हो रूमी गेट सब से रु- बा- रु कराया हेरिटेज वाक़ के कोर्डिनेटर नवेद जी और इमरान जी ने । शुरुआत तो टीले वाली मस्जिद से और पक्के पुल या छत्री वाला पुल से हुई जिसकी तमाम जानकारी हमें हेरिटेज वाक़ कोर्डिनेटर ने दी ।
इसके बाद हमारे साथियों का काफिला कोर्डिनेटर के साथ- साथ इमामबाड़े की ओर चल पड़ा जहाँ पहुँचते ही उसकी नयी खूबियाँ और जानकारी मिली .चाहे हो वो इमामबाड़े का इतिहास या हो आसिफी मस्जिद के गुम्बदों का राज़ इन सबसे रु- बा-रु कराया हमारे कोर्डिनेटर ने .इमामबाड़े के बाड मेरे सभी साथी लगभग २० से २५ लोग चौक की तरफ चल पड़े जहाँ सबसे पहले हम सब पहलवान की ठंडाई के लिए रुके जो ठीक चौक वाले चौराहे पर है जहाँ पर तमाम नामचीन हस्तियाँ ठंडाई लेने कई बार आये हैं दुकान के मालिक ने ये बताया की ये दूकान उनके पर दादा की है जो लगभग १०० साल से भी ज्याज्दा पुराणीहै .हम सब ने पहलवान की ठंडाई का मज़ा लिया जो बहुत ज़ायकेदार रहा और उसके बाड हम सब चौक के गोल दरवाज़े से होते हुए फोलों वाली गलियों की तरफ चल पड़े जिनकी तंग गलियों ने वहां बनी पुराणी कोठियों की दुर्दशा बयान कर रही थीं जो अपनी उजड़ी हुई हालत पर रोti नज़र आ रही थी
खाके लखनऊ ऐ महल गुम्बदो मीनार नहीं
ये सहर सिर्फ सहर नहीं कूच और बाजार नहीं
इसके आँचल में मोहोब्बत के फूल खिलते है
इसकी गलियों में फरिश्तो के पत्ते मिलते है
ये शायरी लखनऊ की हकीक़त बयां कर रही है जिसकी आब व हवा में मोहब्बत मिलती है जहाँ इंसान नहीं फ़रिश्ते बसते हैं वो शहर लखनऊ है जहाँ इंसानों में इंसानियत मिलती है .लखनऊ की खूबसूरती के बारे में सुनते तो बचपन से चले अ रहे हैं लेकिन आखिर कार इस खुबसूरत शहर की कुछ खुबसूरत सी हकीक़त आज जान ने को मिली ।
ये था मेरा खुबसूरत सा सफ़र एक खुबसूरत शहर का ..........................
aap ki aawaz kafi buland hai....ise pura lucknow sunega......deish deish deish
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